तमसो मा ज्योतिर्गमय
तमसो मा ज्योतिर्गमय
पवमान मन्त्र या पवमान अभयारोह बृहदारण्यक उपनिषद में विद्यमान एक मन्त्र है। यह मन्त्र मूलतः सोम यज्ञ की स्तुति में यजमान द्वारा गाया जाता था।
- ॐ असतो मा सद्गमय।
- तमसो मा ज्योतिर्गमय।
- मृत्योर्मामृतं गमय ॥
- ॐ शान्ति शान्ति शान्तिः ॥ – बृहदारण्यकोपनिषद् 1.3.28।
- अर्थ
- मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो।
- मुझे अन्धकार से प्रकाश की ओर ले चलो।
- आइये प्रधानमंत्री जी के दीप प्रज्वलन के आह्वान को समझें और भारतीय एकता ,अखंडता ,सनातन धर्म और संस्कृति का परिचय दें l आइये अपने प्रधान के साथ अंधकार से प्रकाश की ओर चलें l आइये संसार को ये दिखाएं की हमारे देश में विविधता में भी एकता का भाव छुपा हुआ है l हम सब मिलकर किसी भी संकट का सामना करके उस पर विजय ध्वज लहरा सकते हैं परंतु उसके लिए मतभेद भूलने होंगे l 'सबका साथ ,सबका' विकास के लिए प्रधानमंत्री जी के द्वारा ये एक अनूठा प्रयोग है l इस महामारी रूपी अंधकार पर विजय पाने के लिए 05/04/2020 को रात्री 9 बजे से 9 मिनिट के लिए दीप प्रज्वलन करके वातावरण में जो सूक्ष्म विषाणु हैं उन्हे नष्ट करने का प्रयास करें l उस समय महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें या अपने अपने धर्म के अनुसार ईश्वर से प्रार्थना करें l
- - l l सर्वे सन्तु निरामय: l l -
- जय हिन्द l
पं. दिनेश शास्त्री
मो. 8770817904


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